समकालीन सिनेमा और ऐतिहासिक विषयों के साथ रचनात्मक स्वतंत्रता
सिनेमा में इतिहास का प्रस्तुतीकरण जब व्यावसायिक लाभ के लिए तथ्यों को विकृत करने लगे, तो जनमानस पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
इतिहास, समाज, साहित्य, समसामयिक राजनीति और जीवन मूल्यों पर गंभीर व बेबाक वैचारिक स्तंभ।
सिनेमा में इतिहास का प्रस्तुतीकरण जब व्यावसायिक लाभ के लिए तथ्यों को विकृत करने लगे, तो जनमानस पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
जब तक आप स्वयं अपनी आवाज नहीं बनेंगे, कोई दूसरा आपके लिए खड़ा नहीं होगा। जीवन में निडरता का महत्व।
मध्यकाल में जब विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण किया, तब राजपूताना के दुर्गों ने स्वाभिमान की जो गाथा लिखी, वह अद्वितीय है।
प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि उपलब्धियों का मूल्य तभी है जब वे हमें भीतर से संतुष्ट और शांत बना सकें।
इस आलेख में रक्तदान महादान: एक संकल्प जो जीवन बचाता है से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
इस आलेख में महान मराठा साम्राज्य और नौसेना का स्वर्णिम युग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
इस आलेख में दफ्तर की मीटिंग्स और अंतहीन पीपीटी का आतंक से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
प्रिंट से डिजिटल स्क्रीन तक की यात्रा में हिंदी भाषा का विस्तार और युवा रचनाकारों की नई शैली का उदय।
मध्यकालीन इतिहास के अधिकांश स्रोत दरबारी इतिवृत्त रहे हैं। क्या किसी शासक के वेतनभोगी लेखक की रचनाओं को संपूर्ण ऐतिहासिक सत्य माना जा सकता है?
क्लिक्स पाने की होड़ में मुख्यधारा की पत्रकारिता कैसे गंभीर विश्लेषण से दूर होकर सतही तमाशे में बदलती जा रही है?
"वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर सवेरे, वह प्रदीप जो बुझ जाने को है जीवन के घेरे..." दिनकर के ओजस्वी स्वर की गूंज।
दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने से अधिक गंभीर चिंता इस बात की होती है कि स्टार्टर में पनीर गरम मिल रहा है या नहीं!