कबीर की साखियां और 21वीं सदी के सामाजिक पाखंड
कबीरदास जी के दोहे सदियों पूर्व जितने प्रासंगिक थे, आज धार्मिक और सामाजिक संकीर्णताओं के बीच उससे कहीं अधिक मार्गदर्शक हैं।
इतिहास, समाज, साहित्य, समसामयिक राजनीति और जीवन मूल्यों पर गंभीर व बेबाक वैचारिक स्तंभ।
कबीरदास जी के दोहे सदियों पूर्व जितने प्रासंगिक थे, आज धार्मिक और सामाजिक संकीर्णताओं के बीच उससे कहीं अधिक मार्गदर्शक हैं।
इस आलेख में रानी लक्ष्मीबाई: 1857 की वीरांगना का शौर्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
दुनिया में सबसे छोटा जीवन चक्र किसी कीट-पतंगे का नहीं, बल्कि नए साल या सोमवार को लिए गए फिटनेस संकल्प का होता है।
सिनेमा में इतिहास का प्रस्तुतीकरण जब व्यावसायिक लाभ के लिए तथ्यों को विकृत करने लगे, तो जनमानस पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
मध्यकाल में जब विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण किया, तब राजपूताना के दुर्गों ने स्वाभिमान की जो गाथा लिखी, वह अद्वितीय है।
प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि उपलब्धियों का मूल्य तभी है जब वे हमें भीतर से संतुष्ट और शांत बना सकें।
इस आलेख में रक्तदान महादान: एक संकल्प जो जीवन बचाता है से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
इस आलेख में दफ्तर की मीटिंग्स और अंतहीन पीपीटी का आतंक से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
इस आलेख में सिनेमा में भारतीय संस्कृति का सही चित्रण क्यों जरूरी है से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।